पलवलफरीदाबाद

हरियाणा के मेवात में शुरु हुई काले गेहूं की बोआई किसानों को जागरूक करने के लिए कर रहे काले गेहूं की खेती

149views

नूह,हरियाणा
हरियाणा के मेवात में शुरु हुई काले गेहूं की बोआई
किसानों को जागरूक करने के लिए कर रहे काले गेहूं की खेती
किसानों के लिए सोना साबित होगी काले गेहूं की फसल
काला गेहूं कैंसर, मधुमेह, हृदयरोग की रोकथाम में मददगार
पौष्टिकता से भरपूर होगा काला गेहूं- एनएबीआई

देश में सरकार किसानों को खुशहाल बनाने और उनकी पैदावार बढ़ाने की ओर काम कर रही है तो वही किसानों की आमदनी दौरनी करने के लिए एक कारोबारी ने अपने खेतों में किसानों को जागरुक करने के लिए काले गेंहू की खेती की है…जिसका फायदा होता हुआ भी नजर आने लगा है….दरअसल हरियाणा प्रदेश के नूह जिले में पड़ने वाले बिछौर गांव में फरीदाबाद के रहने वाले महेश गोयल ने काले गेंहू की खेती की है…जिसको देखने के लिए आस पास के इलाकों के किसान पहुंच रहे है…महेश गोयल पेशे कारोबारी है…जो फरीदाबाद में रहते है…लेकिन उन्होंने अपने पैतृक गांव में किसानों को उन्न्त करने के लिए उनके सामने एक नए तरीके की खेती की है….वो भी इस तरह की खेती कर अपने आपको उन्नत और खुशपाल बना सके….गांव के लोग एक कारोबारी को खेती करता देख उनके पास नए तरह की खेती करने की रुची ले रहे है…साथ ही किसानों को काले गेंहू की खेती करने की विधि के बारे में बता रहे है…
बाईट- महेश गोयल

महेश गोयल का कहना है कि काले गेंहू में कई औषधीय गुण मौजूद हैं। इस वजह से इसे अत्यंत स्वास्थ्यवर्धक एवं उपयोगी माना गया है…काले गेहूं में एंथोसाइनिन की मात्रा 40 से 140 पीपीएम होता है, जो साधारण गेंहू की तुलना में 8 गुना तक ज्यादा है…इस गेंहू के इस्तेमाल से हृदय, मोटापा और तनाव आदि की बीमारियों से निजात मिलती है। साथ ही जानकारी देते हुए बताया कि जैविक तरीके से उपजाए जाने वाले इस गेहूं के किसानों को अधिक फायदा होगा…साथ ही उन्होंने कहा कि उनका उदेश काले गेंहू को बाजार में बेचना नहीं है बल्कि किसानों को इसका कम दामों पर बीज देना है ताकि वो भी इस फसल की खेती कर सके
बाईट- महेश गोयल

इतना ही नहीं महेश गोयल काम से समय निकालकर गांव के किसानों को इस तरह की खेती से अधिक से अधिक प्रेरित कर रहे है…साथ ही अपने गांव और आसपास के इलाके में लोगों को इस खेती से जुड़ने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूर्णतया जैविक विधि के द्वारा काले गेहूं को अपने खेत में लगाया है….साथ ही उनका कहना है कि काले गेंहू कैंसर, मधुमेह, हृदयरोग की रोकथाम में मददगार और पौष्टिकता से भरपूर है…. काले गेहूं की फसल अगले दो-तीन सालों में उत्तर भारत के खेत भी लहलहाते दिखेंगे।
आपको बतादे ट्रायल के रूप में इसे पंजाब के खेतों में पिछले तीन सालों से लगातार उगाया जा रहा है। बीते रबी सीजन में पंजाब में ही इसका 850 क्विंटल उ‌त्पादन किया गया
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय से शीघ्र ही सीड एक्ट में नोटिफिकेशन और गजट जारी होने जा रहा है। इसके बाद यूपी में भी इसकी कमर्शियल खेती शुरू की जाएगी।
यह काले, नीले एवं जामुनी रंग का गेहूं है, जो सामान्य गेहूं से कहीं अधिक पौष्टिक है। एनएबीआई के विशेषज्ञों का दावा है कि ब्लैक व्हीट यानि काला गेहूं एंटी आक्सीडेंट काफी मात्रा में है जो तनाव, मोटापा, कैंसर, मधुमेह और दिल से जुड़ी बीमारियों के रोकथाम में मददगार है…. विशेषज्ञों का दावा है कि सामान्य गेहूं में जहां एंथोसाइनिन की मात्रा 5 से 15 पास प्रति मिलियन होती है, वहीं काले गेहूं में यह मात्रा 40 से 140 पास प्रति मिलियन होती है। एंथोसाइनिन ब्लू बेरी जैसे फलों की तरह लाभदायक है, यह शरीर से फ्री-रेडिकल्स निकालकर हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, मोटापा सहित कई बीमारियों की रोकथाम करता है। इसमें जिंक की मात्रा भी सामान्य गेहूं से कई गुना अधिक होती है…चण्डीगढ़ के मोहाली स्थित नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नालॉजी इंस्टीट्यूट के सात सालों के शोध के बाद काले गेहूं का पेटेंट कराया गया है…एनएबीआई ने इस गेहूं का नाम ‘नाबी एमजी’ दिया है…चण्डीगढ़ के मोहाली स्थित नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नालॉजी इंस्टीट्यूट की वैज्ञानिक डॉ. मोनिका गर्ग के नेतृत्व में साल 2010 में काले गेहूं पर शोध शुरू किया गया था और सात सालों में संस्थान ने इसका पेटेंट करा लिया।

Leave a Response