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दुनियाभर में देशों ने लॉकडाउन के नियमों को शिथिल किया जिससे सोने की कीमतें घटीं

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दुनियाभर में देशों ने लॉकडाउन के नियमों को शिथिल किया जिससे सोने की कीमतें घटीं

विश्व सरकारें कोरोनावायरस के फिर लौटने की दूसरी लहर से चिंतित बनी हुई हैं क्योंकि कई देशों में नए मामले दर्ज होने की संख्या बढ़ी है। इसके बाद भी देशों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात अर्थव्यवस्था को फिर से खोलना और नागरिकों की सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित करना है। प्रथमेश माल्या, चीफ एनालिस्ट, नॉन-एग्री कमोडिटी एंड करेंसी, एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड

सोना

पिछले हफ्ते स्पॉट गोल्ड की कीमतों में 0.4 प्रतिशत की कमी आई क्योंकि कई देशों ने लॉकडाउन हटा दिया है और इससे आर्थिक रिकवरी की उम्मीद जागी है। इसके कारण निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों में निवेश करने लगे हैं और पीली धातु की कीमतों पर इसका सीधा असर हो रहा है।

चीन ने हांगकांड के लिए कड़े और पुरातन सुरक्षा मापदंड लागू करने का प्रस्ताव दिया, जिससे चीन और अमेरिका के बीच का तनाव और बढ़ गया। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन के खिलाफ कड़े कदम उठाने का वादा किया और हांगकांग में भी व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इन फेक्टर्स ने भी सोने की कीमत को नीचे ला दिया।

चांदी

पिछले हफ्ते स्पॉट सिल्वर की कीमत 3.84 प्रतिशत बढ़कर 17.8 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। एमसीएक्स पर 3.68 प्रतिशत की वृद्धि के साथ चांदी 50,118 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

 

कच्चा तेल

पिछले हफ्ते डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें 6.7 प्रतिशत तक बढ़ गई थीं क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन के साथ फेज-1 ट्रेड डील रद्द नहीं की थी। इससे मां गभी बढ़ गई थी।

जून और जुलाई में उत्पादन में आक्रामक कटौती जारी रहेगी या नहीं यह तय करने के लिए पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग नेशंस (ओपेक) के सदस्यों के बीच एक बैठक आयोजित की गई है। हालांकि, उत्पादन में कटौती पर रूस का इनकार भविष्य के फैसलों पर भारी पड़ेगा।

अमेरिकी क्रूड इन्वेंट्री का स्तर 22 मई तक के सप्ताह में 7.9 मिलियन बैरल तक बढ़ा। हवाई और सड़क यातायात पर प्रतिबंधों के अलावा कच्चे तेल की आपूर्ति स्तर में अचानक वृद्धि ने वैश्विक मांग में कमजोरी का संकेत दिया और इससे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि सीमित दायरे में रही।

बेस मेटल्स

पिछले हफ्ते लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर बेस मेटल की कीमतें मिश्रित रही थी और इनमें एल्युमीनियम को इनमें सबसे ज्यादा लाभ हुआ था।

चीन द्वारा प्रस्तुत व्यावहारिक और भविष्योन्मुखी प्रोत्साहन पैकेजों ने कीमतों में वृद्धि में योगदान दिया। हालांकि, अमेरिका अब भी महामारी के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा रहा है। इससे बात आगे बढ़ सकती है और नतीजतन व्यापारिक युद्ध शुरू हो  सकता है और यह आगे किसी भी वृद्धि को नीचे ले जाएगा।

 

कॉपर

पिछले हफ्ते चीन से मांग बढ़ने की उम्मीद में एलएमई कॉपर 1.6 फीसदी चढ़ गया। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ने आर्थिक पैकेज घोषित किए, जिसमें ढांचागत व्यय बड़ी मात्रा में शामिल था। इससे मांग बढ़ने की उम्मीद है।

यह देखा जाना महत्वपूर्ण है कि दुनियाभर के विभिन्न देशों में बेरोजगारी और गरीबी के बढ़ता स्तर से सरकारें कैसे निपटती हैं। टीके के जल्द विकसित होने की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन सबसे ज्यादा महत्व दुनियाभर में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए लोगों को राहत देने पर होना चाहिए।

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