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देशों ने आक्रामक प्रोत्साहन उपायों की घोषणा की तो सोने की कीमतों में आया उछाल

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देशों ने आक्रामक प्रोत्साहन उपायों की घोषणा की तो सोने की कीमतों में आया उछाल

दुनियाभर की सरकारों की मुख्य चिंता इस बात पर केंद्रित है कि लॉकडाउन के उपाय हटाने, आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने और लोगों की सुरक्षा की गारंटी कैसे दी जाए। कोरोनावायरस की नई लहर की चिंता दुनिया भर के उद्योगों के लिए चेतावनी बनी रही। प्रथमेश माल्या, चीफ एनालिस्ट, नॉन-एग्री कमोडिटी एंड करेंसी, एंजिल ब्रोकिंग लिमिटेड

सोना

पिछले सप्ताह स्पॉट गोल्ड की कीमतें 1.36 प्रतिशत अधिक हो गईं क्योंकि ब्याज दरें कम रहीं और अमेरिका व चीन के बीच नए तनाव पैदा हुए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीनी प्रयोगशालाओं पर उंगलियां उठाईं और उन्हें वायरस प्रसार और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मंदी जैसी स्थिति पैदा करने का दोषी बताया। इससे पीली धातु की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई।

अमेरिका में खराब आर्थिक सूचकांकों और बढ़ते बेरोजगारी के स्तर ने रिकवरी की प्रक्रिया पर आशंकाएं पैदा की और इसका असर बाजार की भावना पर भी हुआ।

 

चांदी

पिछले सप्ताह स्पॉट सिल्वर कीमतें 7 प्रतिशत बढ़कर 16.6 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। एमसीएक्स पर कीमतें 8.3 प्रतिशत बढ़कर 4,6718.0 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुईं।

कच्चा तेल

पिछले हफ्ते ओपेक के नेता सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने घोषणा की कि ओवरसप्लाई की समस्या से निपटने के लिए सप्लाई को 1 मिलियन बीपीडी कम किया जाएगा। इससे डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें 24 प्रतिशत तक बढ़ गई।

4.1 मिलियन बैरल की वृद्धि की उम्मीद के खिलाफ अमेरिकी क्रूड इन्वेंट्री का स्तर 475,000 बैरल कम हो गया, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई।

हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने घोषणा की कि कोरोनोवायरस की वजह से आई रुकावटों के बाद आर्थिक रिकवरी की अवधि उम्मीद से अधिक हो सकती है और हवाई और सड़क यातायात पर प्रतिबंध जारी रहेगा, इससे तेल की कीमतों में किसी भी तरह की वृद्धि सीमित रही।

बेस मेटल्स

पिछले हफ्ते लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर बेस मेटल की कीमतें निगेटिव बनी रहीं, क्योंकि महामारी के फिर लौटने को लेकर चिंता बढ़ रही थी।

औद्योगिक धातुओं को कुछ सहायता मिली क्योंकि पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना और अन्य केंद्रीय बैंकों ने आर्थिक पैकेजों की घोषणा की।

हालांकि, दक्षिण कोरिया और चीन में वायरस के ऩए केस सामने आने के बाद इन संभावनाओं को बल मिला कि लॉकडाउन परिस्थितियों को तेजी से हटाना दुनिया की आबादी पर प्रतिकूल असर डालेगा। इसके चलते बेस मेटल्स की मांग भी कमी देखने को मिली।

कॉपर

अमेरिका और चीन के बीच मजबूत व्यापार युद्ध छिड़ने की आशंका के चलते एलएमई कॉपर की कीमतें 1.75 प्रतिशत कम हो गईं। दुनिया की महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं को फिर से कैसे शुरू किया जाए, इस पर मौजूद अनिश्चितताओं के कारण लाल धातु की कीमतों में कमी आई।

दुनिया भर की सरकारों को बेरोजगारी की उच्च दर और कई देशों में भुखमरी और संकट की रिपोर्ट का प्रभावी ढंग से जवाब देना है। यह आशा की जाती है कि यूरोप के कुछ हिस्सों में केस की संख्या कम होने के साथ, अर्थव्यवस्था फिर</span

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